अनुच्छेद 16 भी समता के अधिकार के अंतर्गत आता है। लेकिन इसके कुछ मामलों में अपवाद भी हैं। अनुच्छेद 16 लोक नियोजन के अवसर की समता की बात करता है। इस अनुच्छेद में 7 खण्ड हैं।
अनुच्छेद 16 (1) :- राज्य के अधीन किसी पद पर नियोजन या नियुक्ति से सम्बन्धित विषयों में सभी नागरिकों के लिए अवसर की समता होगी।
अनुच्छेद 16 (2) :- कोई नागरिक केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, उदभव, जन्म स्थान निवास या इनमें से किसी के आधार पर राज्य के अधीन किसी नियोजन या पद के सम्बन्ध में अपात्र नहीं होगा या उससे विभेद नहीं किया जायेगा। अनुच्छेद 16(1) तथा 16(2) में राज्य के अधीन नियुक्ति के सामान्य नियम दिए गए हैं।
समता के उक्त नियम के अपवाद
समता के उक्त नियम के अपवाद निम्न वर्णित हैं:-
अनुच्छेद 16 (3) :- संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह विधि बनाकर सरकारी सेवाओं में नियुक्ति के किसी वर्ग के लिए शर्त के रूप में निवास का उपबन्ध कर सकती है।
अनुच्छेद 16(4) :- राज्य पिछड़े हुए नागरिकों के किसी वर्ग को जिसका सरकारी सेवाओं पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीँ है, पदों के आरक्षण के लिए व्यवस्था कर सकता है।
(मण्डल आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ऐसी व्यवस्था की जा चुकी है।)
अनुच्छेद 16(5) :- किसी धार्मिक या साम्प्रदायिक संस्था के कार्य से सम्बंधित कोई पद उस विशिष्ट धर्म या विशिष्ट सम्प्रदाय के व्यक्ति के लिए आरक्षित किया जा सकता है, जिससे वह संस्था संबद्घ है।
क्या उच्च जाति की महिला किसी पिछड़ी जाति के पुरुष के साथ विवाह करके अनुच्छेद 16 (4) के अधीन आरक्षण प्राप्त कर सकती है ?
बालसम्मा पाल बनाम कोचीन विश्वविद्यालय 1996 एस• सी• सी• के वाद में उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि यदि उच्च जाति की कोई महिला किसी पिछड़ी जाति के व्यक्ति से विवाह कर लेती है तो उसे अनुच्छेद 16(4) के अन्तर्गत आरक्षण की सुविधा नहीँ मिलेगी।
रेनू बनाम जिला एवं सत्र न्यायाधीश, (2014) 14 एस• सी• सी• 50 में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि कोई भी नियुक्ति जो अनुच्छेद 14 व् 16 के प्रावधानों के विरोध में की जाती है। वह न केवल अनियमित है बल्कि अवैध भी है। नियुक्ति में पारदर्शिता आवश्यक है।
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4 comments:
Good work
शानदार जानकारी
बहुत अच्छा
Shiv prasan singh
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