Followers

Followers

Saturday, 16 December 2017

भारत के संविधान में मूल अधिकार (Fundamental Rights in Indian Constitution)

भारत के संविधान के भाग 3 में बहुत से मूल अधिकारों को स्थापित किया गया है। ये कार्यपालिका व् विधानमण्डल पर अंकुश के रूप में है। मूल अधिकारों को अमेरिका के संविधान से लिया गया है।

मूल अधिकारों का वर्गीकरण

संविधान के अंतर्गत 6 मूल अधिकार प्रदान किये गए हैं :-

समता का अधिकार (अनु•14 से 18)स्वतंत्रता का अधिकार (अनु• 19 से 22)शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनु• 23 से 24)धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनु• 25 से 28)संस्कृति एवं शिक्षा का अधिकार (अनु• 29 से 30)

6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनु• 32 से 35)

समता का अधिकार (अनु•14 से 18)

विधि के समक्ष समता और विधियों का सामान संरक्षण (अनु• 14) :- अनु• 14 के अनुसार भारत राज्य क्षेत्र के भीतर किसी भी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से या विधि के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा।

अनुच्छेद 14 में समता के सामान्य नियम प्रावधानित हैं। अनु• 15, 16, 17 व् 18 उक्त सामान्य नियम के विशिष्ट उदाहरण हैं। यदि अनु• 15, 16, 17 व् 18 का उल्लंघन किया जाता है तो उससे अनु• 14 का भी उल्लंघन होगा।

अनु• 14 में प्रयुक्त शब्द "विधि के समक्ष समता " ब्रिटिश संविधान से व् " विधियों का समान संरक्षण " अमेरिका के संविधान से लिए गए हैं।

अनु• 14 सभी व्यक्तियों पर समान रूप से लागू होता है। चाहें वह नागरिक हों या नहीं, प्राकृतिक व्यक्ति हों या कृत्रिम व्यक्ति जैसे निगम आदि।अनु• 14 के प्रावधान संविधान का आधारभूत ढांचा हैं। इन्हें संशोधन द्वारा नष्ट नहीं किया जा सकता।इसमें नैसर्गिक न्याय का सिद्धान्त अंतर्निहित है।अनु• 14 वर्गीकरण की अनुमति देता है। वर्गीकरण युक्तियुक्त होना चाहिये मनमाना नहीं अन्यथा वर्गीकरण असंवैधानिक होगा।

(1) विधि के समक्ष समता :- यह नकारात्मक अवधारणा है। जिसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को जन्म या मत के आधार पर कोई विशेषाधिकार नहीं होंगे और सभी वर्ग समान रूप सामान्य विधि के अधीन होंगे। यह डायसी के विधिसम्मत शासन की संकल्पना का दूसरा उपसिद्धान्त है। किन्तु भारत के संविधान में इसके कुछ अपवाद हैं।

(2) विधियों का समान संरक्षण :- विधि के समान संरक्षण का अर्थ है समान लोगों में विधि समान होगी और समान रूप से प्रशासित की जायेगी अर्थात सामान लोगों के साथ समान व्यवहार किया जायेगा। वर्गीकरण युक्तियुक्त होना चाहिये मनमाना नहीँ। युक्तियुक्त वर्गीकरण समानता का उल्लंघन नहीं करता है। वर्गीकरण के निम्नलिखित आधार हो सकते हैं :-

i. भाषा और संस्कृति ii. वृत्तिक आधार

iii. भौगोलिक आधार iv. आयु एवं लिंग

V. अन्य सुसंगत बातें।

No comments: